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जोशीमठ चर्चा में क्यों है? आइये जानते हैं!

क्या आपको पता है कि जोशीमठ को आदि शंकराचार्य के कारण जाना जाता है. कहा जाता है कि 8वीं सदी में शंकराचार्य ने जोशीमठ में तपस्या की थी. शंकराचार्य ने भारत में बने चार मठों में पहले मठ की स्थापना यहीं की थी. इसके बाद से ही इस स्थान को ज्योर्तिमठ कहा जाने लगा. इसी नाम को लेकर आज कल जमीन धसने को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है।

उत्तराखंड के चमोली में स्थित ज्योर्तिमठ या जोशीमठ को बद्रीनाथ भगवान की शीतकालीन गद्दी कहा जाता है. इसका कारण यह है कि सर्दियों में ब्रदीनाथ के कपाट बंद होने के बाद बद्री विशाल की मूर्ति को जोशीमठ के वासुदेव मंदिर में ही रखा जाता है. ताकि लोगों को दर्शन करने में किसी समस्या का सामना न करना पड़े।

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धार्मिक मान्यता के अनुसार, हिन्दू धर्म के महानतम धर्मगुरु माने जाने वाले आदि शंकराचार्य द्वारा ही जोशीमठ में पहला ज्योर्तिमठ स्थापित किया गया था. इन दिनों जोशीमठ के जमीन धंसने के कारण यह चर्चा में है और लोगों के मन में बस एक ही सवाल है कि जोशीमठ का क्या होगा. इसका कारण यह है कि जोशीमठ केवल एक स्थान नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म से जुड़ा धार्मिक प्रतीक है, जिससे लोगों की आस्था और श्रद्धा जुड़ी हुई है. अगर कुछ ऐसी अनहोनी होती है तो बहुत बड़ी क्षति उठानी पड़ सकती है।

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मान्यता के अनुसार, हिन्दू धर्म के महानतम धर्मगुरु माने जाने वाले आदि शंकराचार्य द्वारा ही जोशीमठ में पहला ज्योर्तिमठ स्थापित किया गया था. इन दिनों जोशीमठ के जमीन धंसने के कारण यह चर्चा में है और लोगों के मन में बस एक ही सवाल है कि जोशीमठ का क्या होगा. इसका कारण यह है कि जोशीमठ केवल एक स्थान नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म से जुड़ा धार्मिक प्रतीक है, जिससे लोगों की आस्था और श्रद्धा जुड़ी हुई है. आने वाले समय में कुछ इस तरह से न घटित हो हम सभी परमात्मा से यही आशा करते हैं। धन्यवाद।।

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